चार जुलाई: स्वामी विवेकानंद
सतीश कालड़ा, बैंगलोर
SeemaSandesh 04.07.2022
“To the 4th July” स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखित एक अंग्रेजी कविता है। स्वामीजी ने संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता की वर्षगांठ पर 4 जुलाई 1898 को यह कविता लिखी थी। इस कविता में, स्वामी विवेकानंद जी ने स्वतंत्रता की प्रशंसा और महिमामंडन किया है। इस कविता से पता लगता है कि मानव स्वतंत्रता का उनके दिल में कितना महत्व था । संयोग से, 4 जुलाई 1902 को स्वयं विवेकानंद स्वामी जी ने महासमाधि ली और उनकी आत्मा ने इस भौतिक शरीर से स्वतंत्रता प्राप्त की। 4 जुलाई संयुक्त राज्य अमेरिका की वर्ष गांठ है और संयुक्त राज्य अमेरिका स्वामी जी की कर्मभूमि रही। “To the 4th July” कविता लिख कर स्वामी जी द्वारा स्वतंत्रता की भावना का महिमामंडन करना और 4 जुलाई 1902 को भौतिक शरीर से मुक्ति प्राप्त करना शायद स्वामी जी का अपनी कर्मभूमि को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक अंदाज़ था। मुक्त तो स्वामी जी सदा से ही थे।
1893 में विवेकानंद विश्व धर्म संसद में भारत और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका गए। संसद में भारी सफलता प्राप्त करने के बाद, 1893 से 1897 तक, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड की यात्रा की, और धर्म और वेदांत पर व्याख्यान की एक श्रृंखला दी। वह 1897 में भारत लौट आए और 1897 और 1899 के बीच कई राज्यों का दौरा करते हुए वहां की यात्रा की। 1898 में स्वामी जी कश्मीर गए, जहाँ वे डल झील पर एक हाउसबोट पर रुके। कुछ अमेरिकी और अंग्रेजी शिष्यों के साथ कश्मीर में यात्रा करते हुए, विवेकानंद ने यह कविता 4 जुलाई 1898 को संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता की वर्षगांठ के उत्सव के एक भाग के रूप में लिखी और उस दिन के नाश्ते के दौरान इसे जोर से पढ़ने को कहा। कविता अंग्रेजी में है इस लिए इस का कविता में अनुवाद करना शायद हो पाए। आइये जानते है इस कविता में लिखे भावों का सार।
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