हमारी पहचान: रामायण और महाभारत
![]() |
सीमा सन्देश 24.08.2022
पिछले लेख में मैंने ज़िक्र किया था कि हिन्दू संस्कृति में ओतप्रोत होने के लिए हमें कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता। माता, पिता, परिवार और समाज की संस्कृति ही ऐसी है कि हिन्दू संस्कार सहजता से रग रग में समा जाते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण भूमिका है हिन्दू समाज में रामायण और महाभारत का पठन पाठन और भगवान् राम और भगवान् कृष्ण की भक्ति। दुनिया में ऐसी बहुत कम किताबें हैं जिन्होंने आम जनता के दिलो दिमाग पर सदिओं तक इतना गहरा प्रभाव डाला हो। रामायण और महाभारत कुछ ऐसी प्राचीन गाथाएं हैं जिन का ज्ञान सब को सहजता से ही प्राप्त हो जाता है क्योंकि परिवार और समाज में इन की चर्चा ही इतनी होती रहती है और यह जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। सब को इन की कहानी मालूम है। परन्तु फिर भी बार बार इस का अभ्यास होता रहता है। देश के कई भागों में नवरात्री के दिनों में राम लीला खेली जाती है। गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित गोस्वामी तुलसीदास कृत राम चरितमानस तो शायद सब के घर में उपलब्ध है जिस का समय समय पर अखण्ड पाठ या साधारण पाठ चलता रहता है। इस के अतिरिक्त रामायण और महाभारत के विषय को लेकर दूरदर्शन के सीरियल अत्यधिक लोकप्रिय हैं। फिल्में भी बनी हुई हैं। बच्चों के कॉमिक भी इन विषयों को लेकर बने हुए है। रामायण और महाभारत में हर तरह के लोगों के लिए कुछ न कुछ मिलता है: चाहे वह विद्वान् हो या गाँव में रहने वाला साधारण अनपढ़ गंवार। रामायण और महाभारत की कथा से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि परिवार और समाज को क्या जोड़ता है और क्या तोड़ता है। किस तरह समाज में मर्यादा कायम की जा सकती है।
रामायण और महाभारत को लिखने वाले हैं महर्षि वाल्मीकि और वेद व्यास। महर्षि वाल्मीकि ने सब से पहले राम कथा संस्कृत भाषा में लिखी। फिर इस कथा को समय समय पर कई कविओं और लेखकों ने लिखा। उत्तर भारत में गोस्वामी तुलसीदास कृत राम चरितमानस भक्ति की पराकाष्टठा है और बहुत लोकप्रिय ग्रंथ है। महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की गाथा लिख कर मानव समाज को अदभुद भेट दी है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का कथन है कि हज़ारों ऋषि और मुनियों की शृंखला में महर्षि वाल्मीकि और वेद व्यास जी अग्रणी हैं। इन्होंने ब्रह्म ज्ञान को बड़ी सरलता से रामायण, महाभारत इत्यादि के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। समस्त विश्व इनके इस अमूल्य योगदान का सदैव ऋणी रहेगा।
क्या रामायण और महाभारत सिर्फ कथा है या वास्तविक इतिहास है? यह चर्चा इतिहास के तथाकथित विद्वान् समय समय पर किया करते हैं। इस को इतिहास मानो या कथा इन की महानता पर कोई प्रश्न नहीं किया जा सकता। सदिओं पहले रिश्ते नातों और समाज की मर्यादा का इतना अच्छा विश्लेषण अगर काल्पनिक कथा द्वारा भी किया गया है तो उन ऋषिओं को नमस्कार है जिन्हों ने इतना बढ़िया ग्रन्थ रचा और जनसाधारण को ज्ञान दिया। परन्तु हिन्दू समाज के लिए राम और कृष्ण साक्षात् भगवान् के अवतार हैं और भक्ति और श्रद्धा का आधार हैं। राम भक्ति से ओत प्रोत तो सब इतने हैं कि अभिवादन के लिए राम राम शब्द का प्रयोग किया जाता है। राम भक्त हनुमान सब के दिल में बस्ते हैं और भारत में सीता नारी जाति का आदर्श है। कृष्ण तो भक्ति का सार हैं। वृन्दावन में कृष्ण भक्ति की सरिता बहती है। सुरदास और मीरा ने कृष्ण भक्ति की वह धारा बहाई जिस से सारा हिन्दू समाज आत्मविभोर होता रहता है। कृष्ण द्वारा जो अर्जुन को ज्ञान दिया गया वह महाभारत का ही भाग है जिस को हम भगवद गीता के नाम से जानते हैं। इस की चर्चा अगले अंक में। इस अंक में बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि तथाकथित आधुनिक बनने के चक्र में इन महान ग्रंथो को नज़रअंदाज़ करना समझदारी नहीं। इन का ज्ञान सनातन है और इन के साथ जुड़े रहना रूढ़िवाद नहीं बल्कि विवेक है। आशा करता हूँ कि सब रामायण और महाभारत से प्रेरणा लेते रहेंगे।
सतीश कालड़ा
बैंगलोर
10.08.2022

No comments:
Post a Comment