Saturday, April 9, 2022

राम नवमी के शुभावसर पर राम राज्य की परिकल्पना

 राम नवमी के शुभावसर पर राम राज्य की परिकल्पना

Seema Sandesh, Sriganganagar 10.04.2022

राम नवमी के शुभ अवसर पर सब  को हार्दिक शुभकामनायें। अति संतोष का विषय है कि राम जन्म भूमि का विवाद सुलझ चुका है और भव्य राम मंदिर का शिलान्यास हो चुका है।  देश में जय श्री राम का बोलबाला है। हिन्दू संस्कृति में राम और कृष्ण भक्ति जीवन का आधार  है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस लिख कर हिंदी साहित्य को एक गौरव ग्रन्थ प्रदान किया  और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम के जीवन और उनके परिवार की ऐसी व्याख्या प्रस्तुत की जिस में  आदर्श पिता, आदर्श पुत्र, आदर्श पत्नी, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श सेवक, आदर्श गुरु, आदर्श राजा का ऐसा चरित्र चित्रण किया जिस से हिन्दू समाज सदिओं से प्रेरणा लेता रहा है। अंग्रेज़ जब गरमाटिया मज़दूरों  को फीजी, टोबैगो, मॉरिशयस, सूरीनाम इत्यादि देशों में लेकर गए तो वह लोग आपने साथ रामचरितमानस और हनुमान चालीसा ले गए।  अब वह देश आज़ाद हो गए परन्तु राम कथा का चलन अभी भी वहां पर प्रचलित है।  इसी तरह से बाली और कम्बोडिया में भी राम लीला खेली जाती है।  भारत में हर हिन्दू के घर में रामायण और गीता का पाठ चलता ही रहता है।    


अब समय आ गया है राम राज की स्थापना करने का। यही भगवान् राम की सही पूजा अर्चना होगी। कई लोग तो इस का परिहास भी कर देते हैं। वह कहते है कि राम राज का  मतलब ऐसा राज जिस में जिस का जो मन करे कर ले।  परन्तु यह परिहास अज्ञानता का परिणाम है। राम राज की परिकल्पना देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी की थी। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात अमृत काल में देश में राम राज की स्थापना करने से बेहतर संकल्प और क्या हो सकता है? आइये समझते हैं कि राम राज से क्या तातपर्य है?


14 वर्ष का बनवास पूरा कर भगवान् राम अयोध्या के राज सिंघासन पर विराजमान हुए और चक्रवर्ती सम्राट बने। आम लोग इस राज  के बारे में शायद यही जानते हैं कि किसी धोबी के कहने पर श्री राम चन्दर जी ने सीता माता को त्याग दे दिया और सीता माता अज्ञातवास में चली गई।  कई लोग इस बात का परिहास भी करते है।  परन्तु बहुत कम लोग इस बात से अवगत हैं कि उस कालखंड में देश में शांति, उत्साह और अदभुद प्रगति हुई थी और उसी को रामराज कहते है।  यह वह कालखंड था जब देश में कोई भूखा प्यासा  नहीं सोता था।  सब को रोज़गार प्राप्त  था और रोटी, कपड़ा और मकान  सुलभ था।  देश में कानून और व्यवस्था थी।  कोई चोरी डकैती धोखा बलात्कार रिश्वतखोरी  इत्यादि नहीं करता था।  बल्कि सब आपने आपने कर्तव्य का पालन करते थे।  सही आचरण और विचार सब जगह था।  यह सब इस लिए संभव था कि गुरुकुल में सही शिक्षा दी जाती थी और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति सही आचरण एवं प्यार   की प्रतिमूर्ति थे। कर्मचारी  कर्तव्यपरायण थे, व्यापारी धोखा नहीं करते थे और सेवक वफादार थे।   


“सब का साथ, सब का विकास और सब का विश्वास” नारा देकर  शायद सरकार देश को राम राज की तरफ अग्रसर करना चाहती है।  परन्तु देश में बहुत कुछ करना बाकी है।  रोज़गार के अवसर सब को सुलभ नहीं है। 10% जनता भुखमरी से ग्रसित है, 25% जनता गरीब है, और कर्मचारी घूसखोर है।  भ्रष्ट नेता, रिश्वतखोर अधिकारी और पुलिस  और टैक्स चोर व्यापारियों का गठबंधन हो रखा है।  उन्होंने विलासता भरी ऐसी जीवन शैली अपना रखी है कि जनसाधारण परेशान है। ऐन केन प्रकेण अर्जित धन से बने अमीरों को जनता आदर्श समझ  लेती है।    किसान परेशान है और किसान के बच्चे ज़मीन बेच कर विदेश जा रहे हैं।  


केंद्र सरकार के कार्यों में कुछ सुधार होना शुरू हुआ है।  देश में सड़कों का जाल  बिछ गया है और रेल यात्रा में भी सुधार हुआ है।  विदेश नीति से भी देश की प्रतिभा बढ़ी है। देश की कर्तव्य परायण सेना ने देश को सुरक्षा प्रदान कर रखी है।   देश का युवा वर्ग अच्छी अच्छी पढाई कर विश्व की उम्दा कम्पनिओं में नेतृत्व कर रहे हैं।  परन्तु अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है और ख़ास तौर पर बैंकिंग सेक्टर में।   प्रदेश सरकारों में और जिला और पंचायत स्तर  के कर्मचारी और पुलिस अभी भी रिश्वत खोर हैं और अदालतों में जनता को इन्साफ मिलने में बहुत देरी होती है।  गृहस्थ जीवन भी बिखरता जा रहा है।   केवल जय श्री राम का नारा लगाने से कुछ नहीं बनेगा।  राम के आदर्श पर चलने की आवश्यकता है और कर्तव्यप्रायण कर्मचारी चाहिए और सुदृढ़ परिवार।  राम नवमी के सुअवसर पर पुनः यह शुभकामना करते हैं कि हर नर में राम सा चरित्र हो और नारी में सीता का और देश में राम राज स्थापित हो।  


सतीश कालड़ा 

बैंगलोर

10.04.2022